आखिर क्यों की आर बीआई से 1.76 लाख करोड़ की मांग मोदी सरकार ने ,जानिए

आखिर क्यों की आरबीआई से 1.76 लाख करोड़ की मांग मोदी सरकार ने ,जानिए

बोर्ड ने केंद्र सरकार को 1,76,051 करोड़ रुपये देने का फैसला किया है आपको बता दें आरबीआई के पास अपनी कुल संपत्ति के 28 फीसदी के बराबर बफर पूँजी है। बिमल जालान की अध्यक्षता में रिजर्व बैंक के सेंट्रल बोर्ड से मंजूरी मिल गयी हैं सोमवार को चली बैठक के बाद आरबीआई ने कहा, ‘बोर्ड ने मोदी सरकार को 1,76,051 करोड़ रुपये ट्रांसफर करने का फैसला कर लिया है।

जिसके चलते भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) केंद्र सरकार को 1.76 लाख करोड़ रुपये देगी। इसमे 1,23,414 करोड़ रुपये की सरप्लस राशि 2018-19 के लिए होगी ।और इसके अलावा संशोधित आर्थिक पूँजी ढांचे के अनुसार अतिरिक्त प्रावधानों के तहत 52,637 करोड़ रुपये भी दिए जाएंगे ।

नरेन्द्र मोदी, प्रधानमंत्री

अब सवाल यह आता है की इस राशि का लेने से क्या तात्पर्य है।दावा किया जा रहा है कि इससे मोदी सरकार को सार्वजनिक वित्तीय संस्थानों की ख़राब हालत को ठीक करने में मदद मिलेगी। आरबीआई के पूर्व गवर्नर विमल जालान की अध्यक्षता में एक समिति बनी थी और इसी समिति ने न्यू इकनॉमिक फ्रेमवर्क की सिफ़ारिश की थी। इस समिति की सिफ़ारिशों को आरबीआई ने स्वीकार कर लिया है। इस कमेटी में सुभाष चंद्र गर्ग की जगह वित्त सचिव राजीव कुमार को मिली।

विमल जालान , आरबीआई पूर्व गवर्नर

सरप्लस ट्रांसफर जीडीपी (2018-19) का 1.25 प्रतिशत है. रिजर्व बैंक ने मोदी सरकार की सलाह के बाद एक कमेटी का गठन किया था, जिसकी अध्यक्षता आरबीआई के पूर्व गवर्नर बिमल जालान ने संभाला। विमल जालान समिति ने सिफ़ारिश की थी कि आरबीआई के पास अपनी बैलेंसशीट के 5.5 से 6.5 फ़ीसदी रक़म होनी चाहिए. इससे पहले यह राशि 6.8 फ़ीसदी थी. सरकार का लक्ष्य है कि 2020 बजट घाटा जीडीपी का 3.3 फ़ीसदी किया जाए.

उर्जित पटेल, आरबीआई पूर्व गवर्नर

इस विवाद के बीच उर्जित पटेल ने निजी कारणों को बताते हुए आरबीआई गवर्नर पद से इस्तीफ़ा दे दिया था। वित्त मंत्रालय ने तर्क दिया था कि आरबीआई के पास अपनी कुल संपत्ति के 28 फीसदी के बराबर बफर पूँजी है, जो वैश्विक स्तर पर केंद्रीय बैंकों द्वारा रखे जाने वाली रिजर्व पूंजी की तुलना में कहीं ज्यादा है। वैश्विक नियम 14 फीसदी का ही है।

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