Dussehra 2019: जानिए दशहरे के दिन क्यों खाते हैं जलेबी

festival food

दशहरे का त्योहार देश के अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग रीति रिवाजों के साथ मनाया जाता है. लेकिन एक बात जो हर जगह एक जैसी होती है, वह है-मिठाईयां. उत्तर भारत में इस दिन खास तौर पर जलेबी खाई जाती है. कई लोग इस खास मौके पर घर में भी जलेबी बनाते हैं. वहीं कई जगहों पर मालपुआ, मीठा पुआ और गुजराती व्यंजन फाफाड़ा भी बनाया जाता है. लेकिन जलेबी हर जगह कॉमन होती है.

दरअसल, जलेबी को पूरे भारत की पसंदीदा मिठाई कह सकते हैं. केसरी या पीले रंग की ये पारंपरिक मिठाई दशहरा, दिवाली या अन्य खास अवसरों पर घरों में बनाई जाती है. दशहरे पर जब आप रावण दहन देखने जाते हैं, तो वहां भी फूड स्टॉल्स पर आपको ये मिठाई जरूर दिख जाएगी. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि दशहरे के दिन लोग जलेबी क्यों खाते हैं. दरअसल, ऐसी मान्यता है कि भगवान राम को शश्कुली नाम की एक मिठाई बहुत पसंद थी. इसी को आज हम जलेबी के नाम से जानते हैं. इसलिए रावण दहन के बाद लोग जलेबी खाकर खुशी मनाते हैं.

गुजरात में पॉपुलर है फाफड़ा-जलेबी

गुजरात में नवरात्रि के दौरान लोग 9 दिनों का व्रत रखते हैं. ऐसा माना जाता है कि व्रत खोलने के लिए चने के आटे यानी बेसन से बनी हुई कोई चीज खानी चाहिए. फाफड़ा गुजरात का सबसे पसंदीदा नमकीन है और दशहरे पर आपको ये स्नैक वहां के हर घर में मिल जाएगा.

वहीं जलेबी की बात करें, तो फाफड़े के साथ जलेबी का कॉम्बिनेशन लोगों को पसंद आता है. इसलिए गुजरात में नवरात्रि और दशहरे के दौरान ये दोनों चीजें खूब खाई जाती हैं.

सेहत के​ लिए भी अच्छी है
न्यूट्रिशनिस्ट्स का मानना है कि गर्म जलेबी को जब आप दूध में डालकर खाते हैं, तो इससे माइग्रेन में आराम मिलता है. वहीं बेसन का आटा व्रत के बाद पेट के लिए अच्छा माना जाता है. फाफड़ा जलेबी के कॉम्बिनेशन को ऊर्जा का एक अच्छा स्त्रोत भी माना जाता है.

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