दिल्ली विधानसभा चुनाव: केजरीवाल ने इस दिग्गज नेता को हराया था, नहीं थी किसी को उम्मीद

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Edited By: टाइम्स हिन्दी

Updated on: 19 घंटे पूर्व
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नई दिल्ली: लोकसभा सीट हो या विधानसभा सीट, जंहा लोगों के दिलों में जगह बनाकर लगातार जीत दर्ज करना बड़ी बात है. वहीं इस क्रम में जनकपुरी विस सीट ने मिसाल कायम हो गईं है. जंहा यह सीट भाजपा की सबसे सुरक्षित सीट मानी जाती थी. वहीं वर्ष 1993 से लेकर 2013 तक इस सीट से भाजपा के प्रत्याशी रहे प्रोफेसर जगदीश मुखी ने एकतरफा जीत हासिल की थी.

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार इस बात का पता चला है कि यह थी कि सभी लोग पहले से यही मानकर चलते थे कि इस सीट पर भाजपा को हराना नामुमकिन है. लेकिन राजनीति में बदलाव आया और वोटरों का मिजाज भी बदलने लगा. इसका प्रारंभिक असर पहली बार वर्ष 2013 के विधानसभा चुनाव में देखने को मिला, जब प्रो. जगदीश मुखी ने आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी राजेश ऋषि को मात्र 2644 वोटों के अंतर से हराया था. यह बदलाव साल 2015 आते-आते पूरी तरह देखने को मिला और इस बार AAP के प्रत्याशी राजेश ऋषि ने प्रो. जगदीश मुखी को 25 हजार से ज्यादा वोटों के अंतर से शिकस्त दी थी.

वहीं वर्ष 1993 की बात करें तो इस चुनाव में प्रो. जगदीश मुखी ने कांग्रेस प्रत्याशी शैलेंद्र को हराया था. जंहा इसके बाद वर्ष 1998 में हुए चुनाव में कांग्रेस के साथ भाजपा का करीबी मुकाबला रहा. इस चुनाव में भाजपा प्रत्याशी प्रो. जगदीश मुखी ने कांग्रेस प्रत्याशी शिव कुमार सोढ़ी को 7700 वोट के अंतर से हराया था. लेकिन यह भी कहा जा रहा है तक हुए विधानसभा चुनाव में अन्य जगहों पर कांग्रेस ने बेहतर प्रदर्शन किया था, लेकिन इस सीट पर उसे हार मिली थी. इसी तरह वर्ष 2003 में हुए चुनाव में कांग्रेस ने दोबारा शिव कुमार सोढ़ी को मैदान में उतारा, लेकिन इस बार भी हार मिली. इसी तरह वर्ष 2008 में भी कांग्रेस को सफलता नहीं मिली. इसके बाद वर्ष 2013 में हुए चुनाव में AAP दूसरे नंबर पर थी, जबकि कांग्रेस तीसरे नंबर पर पहुंच गए है.

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