Dussehra 2019: मथुरा का ये मुस्लिम परिवार हर दशहरे पर बनाता है रावण का पुतला

ravan effigy

आगरा. हर साल की तरह इस बार भी मुस्लिम कारीगर जफर अली तल्लीन होकर रावण के पुतले बना रहे हैं. 8 अक्टूबर को विजयदशमी है और जफर के पास सांस लेने तक की फुरसत नहीं है. इन दो दिनों में वो अपने पुतलों को फाइनल टच देंगे.

जफर मथुरा से हैं. पुतले बनाने का ये काम एक तरह से पुश्तैनी है. उनकी पिछली तीन पीढ़ियां भी यही काम करती रही हैं. वह मुस्लिम समुदाय से आते हैं, लेकिन ये बात यहां बिल्कुल मायने नहीं रखती. मायने रखता है, तो बस उनका समर्पण और उनकी कला. उनका ये समर्पण सांप्रदायिक सद्भाव और भाईचारे की भी मिसाल है.

वह कहते हैं, ‘मेरा परिवार पीढ़ियों से रावण के पुतले बनाने का काम कर रहा है. हम ये काम इसलिए भी करते हैं, जिससे हिंदू-मुस्लिम एकता का एक उदाहरण पेश कर सकें. हां, हम मुस्लिम हैं, पर ये काम बड़े ही मन से करते हैं.’

इस बार जफर 100 फुट ऊंचा रावण का पुतला बना रहे हैं. इस पुतले को शहर के रामलीला ग्राउंड में दहन के लिए लगाया जाएगा. अली ने रावण के साथ मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतले भी बनाए हैं. हर साल नवरात्रि के 9 दिनों की पूजा के बाद दशहरे वाले दिन जफर अली अपने पुतलों के साथ हिंदुओं के इस त्योहार में ​​शामिल होते हैं.

जफर अली के साथ काम कर रहे उनके एक सहयोगी आमिर कहते हैं, ‘पुतले बनाना एक तरह से हमारा धर्म है. मैं हिंदू और मुस्लिम में कोई फर्क़ नहीं मानता. ये तो राजनीतिक दलों के नेता हमें धर्म के नाम पर बांटते हैं. हमारा ये काम ही, हमारा धर्म है. मेरे पिता भी यही काम करते थे और पिछले 40 सालों से मैं ये काम कर रहा हूं. मेरे लिए हिंदू और मुस्लिम दोनों एक समान हैं. हमारे कारीगर सिर्फ आगरा ही नहीं, मथुरा, दिल्ली, सूरत और मुंबई तक पुतले बनाने जाते हैं.’

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